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रिवर्स ओस्मोसिस(RO)
November 26, 2019
Joint River Commission- JRC (India-Bangladesh)
December 20, 2019

 

 सन्दर्भ:-

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization-WHO) ने स्तन कैंसर के इलाज के लिये उपयोग में लाई जाने वाली दवा ट्रास्टूजुमैब (Trastuzumab) के पहले बायोसिमिलर्स (Biosimilars) दवा के वाणिज्यिक प्रयोग की अनुमति प्रदान की।

मुख्य तथ्य:-

  • वैश्विक स्तर पर महिलाओं में स्तन कैंसर के काफी मामले प्रायः देखने को मिलते हैं। वर्ष 2018 में लगभग 21 लाख महिलाएँ स्तन कैंसर से पीड़ित थीं, इनमें से 6 लाख 30 हज़ार महिलाओं की मौत इलाज में देरी या आवश्यक उपचार की सुविधा न होने की वजह से हो गई।
  • ट्रास्टूजुमैब नामक दवा को WHO द्वारा आवश्यक दवाओं की सूची में वर्ष 2015 में शामिल किया गया था।
  • यह दवा स्तन कैंसर के लगभग 20 प्रतिशत मामलों के इलाज में सफल रही है तथा प्रारंभिक एवं कई मामलों में उच्च स्तरीय कैंसर के इलाज में भी काफी प्रभावी साबित हुई है।
  • इस दवा के अत्यधिक कीमती होने की वजह से यह विश्व की अधिकांश महिलाओं तथा देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था द्वारा वहनीय नहीं है।
  • इस दवा के बायोसिमिलर्स की जाँच में WHO द्वारा इसकी प्रभावशीलता, सुरक्षा तथा गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं और विभिन्न देशों द्वारा आपूर्ति हेतु अनुसंशित किया गया।
  • पिछले पाँच वर्षों में ट्रास्टूजुमैब के कुछ बायोसिमिलर्स विकसित किये गए हैं लेकिन उनमें से किसी को WHO द्वारा पूर्व-अर्हता नहीं प्रदान की गई है। पूर्व-अर्हता प्राप्त करने के बाद देशों को इस बात का आश्वासन दिया जाता है कि वे इन दवाओं का प्रयोग कर सकते हैं।
  • हाल ही में अफ्रीका के उप-सहारा क्षेत्र में 1325 महिलाओं पर किये गए एक अध्ययन के अनुसार स्तन कैंसर की शुरूआती पहचान के बावजूद एक वर्ष तक 227 (17%) महिलाओं का इलाज संभव नहीं हो सका। इन आँकड़ों से पता चलता है कि कैंसर के उपचार में इलाज का खर्च एक बड़ी बाधा है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की अंतर्राष्ट्रीय कैंसर शोध एजेंसी के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2040 तक स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या लगभग 31 लाख तक पहुँच जाएगी।

बायोसिमिलर्स क्या है:-

  • जेनेरिक दवाओं की भाँति ही बायोसिमिलर्स भी मूल बायो-थेराप्यूटिक दवाओं (Biotherapeutic Medicines) का सस्ता रूपांतरण होता है, इनकी प्रभावशीलता समान होती है। कंपनियों द्वारा इनका निर्माण तब किया जाता है जब मूल उत्पाद की पेटेंट (Patent) अवधि समाप्त हो गई हो।

 

source- THE HINDU

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