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प्रसंग:-

27 दिसंबर, 2019 को आंध्र प्रदेश मंत्रिमंडल ने राज्य की राजधानी को तीन अलग स्थानों पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।

मुख्य बिंदु:

  • आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 17 दिसंबर, 2019 को घोषणा की थी कि दक्षिण अफ्रीका मॉडल पर राज्य की तीन विकेंद्रीकृत राजधानियाँ हो सकती हैं।
  • ध्यातव्य है कि आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के रूप में अमरावती शहर को प्रस्तावित किया गया था और जिसका निर्माण वर्ष 2015 से चल रहा है।
  • नई घोषणा के अनुसार, निर्माणाधीन अमरावती विधायी राजधानी, तटवर्ती विशाखापत्तनम कार्यकारी राजधानी और कर्नूल न्यायिक राजधानी के रूप में स्थापित हो सकती है।
  • यह निर्णय जी. एन. राव की अध्यक्षता में बनी समिति के सुझावों के आधार पर लिया गया।

राजधानी को विकेंद्रीकृत करने के कारण:

  • समिति के अध्यक्ष जी. एन. राव ने कहा कि राजधानी का विकेंद्रीकरण करना राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखने में सहायक होगा।
  • राज्य के आंचलिक क्षेत्रों तक सरकार की पहुँच बढ़ेगी।

एक से अधिक राजधानी वाले अन्य राज्य:

  • भारतीय राज्यों में महाराष्ट्र की दो राजधानियाँ मुंबई और नागपुर हैं (राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र नागपुर विधानसभा में होता है)।
  • हिमाचल प्रदेश की दो राजधानियाँ शिमला और धर्मशाला (शीतकालीन) हैं।

विकेंद्रीकृत राजधानी के लाभ:

  • प्रशासन के प्रमुख तंत्रों के विकेंद्रीकृत होने से राज्य के सुदूर हिस्सों में सरकार की पहुँच बढ़ती है।
  • प्रमुख सरकारी संस्थानों के विकेंद्रीकृत होने से एक ही स्थान के बजाय कई क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर उत्पन्न होते हैं।
  • जनता के मध्य सांस्कृतिक मेलजोल को बढ़ावा मिलता है।

विकेंद्रीकृत राजधानी के दुष्प्रभाव:

  • प्रशासन के प्रमुख तंत्रों के विकेंद्रीकृत होने से संस्थानों में आपसी सामंजस्य की समस्या।
  • नौकरशाही का शासन में दखल बढ़ता है।
  • समय की हानि आदि।

 

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

 

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