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Attack of Locusts in Gujarat

Nagpur Resolution
December 30, 2019
chief of defence staff-CDS
December 30, 2019

सन्दर्भ:-

हाल ही में गुजरात में पाकिस्तान के सीमावर्ती कुछ ज़िलों में टिड्डियों के समूहों ने आक्रमण किया है, यह सीमावर्ती क्षेत्रों में कृषि करने वाले किसानों के लिये चिंता का विषय है।

प्रमुख बिंदु:

इन टिड्डियों से उत्तरी गुजरात के तीन सीमावर्ती जिलों बनासकांठा, पाटन और कच्छ में फसल को उजाड़ देने से किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

स्थिति क्या है?

  • टिड्डियों के हमले से प्रभावित ज़िलों में बनासकांठा (Banaskantha) सर्वाधिक प्रभावित ज़िला है।
  • इन टिड्डियों का समूह दिन के दौरान उड़ता रहता है तथा रात में खेतों में ही रुक जाता है, जिससे टिड्डियों के इन समूहों को भगाना मुश्किल हो जाता है।
  • इन टिड्डियों को भगाने के लिये किसान ढोल और बर्तन पीटने तथा धुंआ करना जैसी पुरानी तकनीकों का प्रयोग करते हैं।

विभिन्न संस्थानों द्वारा दी गई चेतावनी की उपेक्षा:

  • संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (UN-Food and Agriculture Organisation- FAO) ने भारत और पाकिस्तान सहित दक्षिण एशिया में टिड्डियों के आक्रमण की चेतावनी जारी की थी।
  • इसके अतिरिक्त टिड्डी चेतावनी संगठन (Locust Warning Organization-LWO) ने भी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर टिड्डियों के आक्रमण की भविष्यवाणी की थी। इसके बावजूद राज्य प्रशासन द्वारा निवारक उपाय नहीं किये गए।
  • LWO के अनुसार, ये टिड्डियाँ पाकिस्तान के सिंध प्रांत से उड़कर आ रही हैं और राजस्थान एवं गुजरात के गाँवों में फैल रही हैं, इसका कारण इस वर्ष दक्षिण-पश्चिमी-मानसून का लंबे समय तक प्रभावी रहना था।
  • मूल रूप से इन टिड्डियों ने इस वर्ष फरवरी में अफ्रीकी देशों सूडान और इरिट्रिया से सऊदी अरब एवं ईरान के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश किया तथा सिंध प्रांत से होते हुए राजस्थान और गुजरात क्षेत्र को अपने आक्रमण से प्रभावित किया।

राज्य द्वारा उठाए गए कदम:

  • केंद्रीय प्रशासन के साथ मिलकर राज्य प्रशासन ने इन टिड्डियों को नष्ट करने के लिये एक कीटनाशक-छिड़काव अभियान शुरू किया है।
  • सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर के माध्यम से कीटनाशक रसायनों का छिड़काव कराए जाने की संभावना व्यक्त की है।
  • सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया है कि किसानों को हुए नुकसान के आकलन के लिये एक सर्वेक्षण करेगा और तदनुसार किसानों को मुआवज़ा प्रदान करेगा।

टिड्डी चेतावनी संगठन:

(Locust Warning Organization-LWO)

  • इसका मुख्यालय फरीदाबाद में स्थित है।
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare) के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय (Directorate of Plant Protection Quarantine & Storage) के अधीन आने वाला टिड्डी चेतावनी संगठन मुख्य रूप से रेगिस्तानी क्षेत्रों राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में टिड्डियों की निगरानी, ​​सर्वेक्षण और नियंत्रण के लिये ज़िम्मेदार है।

LWO के कार्य:

  • टिड्डियों पर अनुसंधान करना।
  • राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ संपर्क और समन्वय स्थापित करना।
  • टिड्डी चेतावनी संगठन के सदस्यों, राज्य के अधिकारियों, BSF कर्मियों और किसानों को इस क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • टिड्डियों के कारण निर्मित होने वाली आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिये टिड्डी नियंत्रण अभियान प्रारंभ करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय दायित्त्वों और प्रतिबद्धताओं को मानते हुए अनुसूचित मरुस्थलीय क्षेत्रों (Scheduled Desert Area-SDA) में टिड्डियों की निगरानी और आवाज़ाही को नियंत्रित करना।

भारत में पाई जाने वाली टिड्डियों के प्रकार:

  • रेगिस्तानी टिड्डी
  • प्रवासी टिड्डी
  • बॉम्बे टिड्डी
  • ट्री टिड्डी

टिड्डियों को नियंत्रित करने के उपाय:

  • अण्डों का विनाश करना
  • घेराबंदी द्वारा इन्हें फसाना
  • कीटनाशकों का प्रयोग करना

स्रोत- द हिंदू

 

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